ऑस्कर-2022 के लिए भारत की ओर से ‘राइटिंग विद फ़ायर’ हुई नॉमिनेट
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ऑस्कर 2022 नॉमिनेशंस की घोषणा हो चुकी है। इसकी पूरी लिस्ट सामने आ गई है। नॉमिनेशन के अनाउंसमेंट की लाइव स्ट्रीमिंग ट्रेसी एलिस रॉस और एक्टर-कॉमेडियन लेस्ली जॉर्डन ने मंगलवार को की। अकादमी अवॉर्ड सेरेमनी का आयोजन लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में 27 मार्च को होगा। ऑस्कर 2022 के लिए इंडियन डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राइटिंग विथ फायर’ बेस्ट डॉक्यूमेंट्री की श्रेणी में नॉमिनेट किया गया है। हालांकि सोशल मीडिया पर चर्चा चल रही थी कि साउथ सिनेमा इंडस्ट्री की फिल्में सूर्या की ‘जय भीम’ (Jai Bheem) और मोहनलाल की ‘मराक्कर’ (Markkar) नॉमिनेशंस में अपनी जगह बना सकती हैं, लेकिन दोनों ही फ़िल्में अपनी जगह नहीं बना पाईं।
डॉक्यूमेंट्री ‘राइटिंग विद फ़ायर’ हुई ऑस्कर के लिए नॉमिनेट
दुनिया के पॉपयुलर अवॉर्ड्स में से एक एकेडमी अवॉर्ड्स के नॉमिनेशन का ऐलान हो चुका है। ‘राइटिंग विद फायर’ ने 2022 के ऑस्कर अवॉर्ड्स की आखिरी नॉमिनेशन लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। ट्रेसी एलिस रॉस और लेसली जॉर्डन ने मंगलवार, 8 जनवरी की शाम को ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की नॉमिनेशन लिस्ट को जारी किया है जिसमें राइटिंग विथ फायर’ को भी जगह दी गई है। ‘राइटिंग विद फायर’ के साथ इस मुकाबले में ‘एसेनशन’, ‘अटिका’, ‘फ्ली’ और ‘समर ऑफ सोल’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं।
Presenting the 94th #Oscars Nominations Show. #OscarNoms https://t.co/Zh1c00Anje
— The Academy (@TheAcademy) February 8, 2022
ऑस्कर 2022 (Oscar 2022) नॉमिनेशंस की अनाउंसमेंट लाइव स्ट्रीम के जरिए किया गया था, इसे Oscars.org, एबीसी, यूट्यूब, ट्विटर और फेसबुक पर देखा जा सकता हैं। ट्विटर पर पोस्ट किए गए इस लाइव स्ट्रीम को आप नीचे दिए गए वीडियो में देख सकते हैं। इस वीडियों में ऑस्कर अवॉर्ड्स 2022 की पूरी लिस्ट दिखाई गई है।
क्या है ‘राइटिंग विद फ़ायर’ में?
थॉमस और सुष्मित घोष द्वारा निर्देशित “राइटिंग विद फायर” दलित महिलाओं द्वारा संचालित भारत के एकमात्र समाचार पत्र ‘खबर लहरिया’ की कहानी है। इस डॉक्युमेंट्री में मुख्य रिपोर्टर मीरा के नेतृत्व वाले दलित महिलाओं के महत्वाकांक्षी समूह की कहानी को दिखाया गया है, जो प्रासंगिक बने रहने के लिए प्रिंट से डिजिटल माध्यम में स्विच करती हैं। स्मार्टफोन और उन्हें परिभाषित करने वाले साहस और दृढ़ विश्वास के साथ, खबर लहरिया के पत्रकार अपने क्षेत्र में अन्याय की जांच और दस्तावेजीकरण करते हैं। वे स्थानीय पुलिस बल की अक्षमता पर सवाल उठाते हैं, जाति और लिंग हिंसा के शिकार लोगों की सुनते हैं और उनके साथ खड़े होते हैं। धमकी का सामना करते हैं और अपने समाज के मानदंडों को चुनौती देते हैं जो उनकी यात्रा में अन्याय को कायम रखते हैं।
देश का पहला अखबार था ख़बर लहरिया, जिसे चलाती थीं दलित महिलाएं
बुंदेलखंड में प्रकाशित अख़बार ‘खबर लहरिया’ भारत का एक मात्र अखबार था, जिसे सिर्फ दलित महिलाएं संचालित करती थीं। आठ पन्नों के अखबार खबर लहरिया में महिला रिपोर्टर बदलते समाज, भ्रष्टाचार, सरकार के अधूरे वादों, गरीबों और महिलाओं की कहानियां सुनाती थीं। खबर लहरिया नामक अखबार बुंदेलखंडी भाषा में 2002 से चित्रकूट समेत बुंदेलखंड के कई जिलों से प्रकाशित होता था। हालांकि, 2015 में यह बंद हो गया। तब से लेकर अब तक मोबाइल पोर्टल पर खबर लहरिया संचालित है। इस पूरी टीम में महिलाएं ही काम करती हैं। खबर लहरिया के लिए इसके संस्थापक एनजीओ निरंतर को यूनेस्को किंग सेजोंग लिट्रेसी सम्मान 2009 से सम्मानित किया गया था।